सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

रिश्ते संभालिए(शीर्षक)


 हेलो👋 friends नमस्कार🙏

               कविता का शीर्षक

                       रिश्ते

               *************

आज की मेरी जो कविता है।वो रिश्तों पर आधारित है।

friends हमारे जीवन मे जो भी हमसे जुड़े रिश्ते होते है,वो चाहे माता,-पिता ,भाई-बहन ,का जो भी रिश्ते होते है।उसे हमे दिल से निभाना चाहिए। क्योंकि कोई भी परेशानी आये या कोई तकलीफ यही रिश्ते हमारे काम आते है। कोई और रिश्ते नही 

इसलिये अपनो को ओर अपने रिश्तों को संभाल कर रखिये।



कोई भी रिश्ता दिल से निभाये❤️(कविता)

**********************************


चंद फूलो को तोड़के, पौधे नही मुरझाते...

आश किसी को देके ,जब अपने मुकरजाते।


दिल दुखता है,की तू मेरा एक है...

पर मील ना सात जन्म दिल से दुआ है।


मेरा प्यार राधा की तरह नहीं ,जिस पर हक राधा का है

हम तो वो मीरा है,जिसने उस श्याम को पाने


की खातिर जहर का प्याला पी लिया।

इसलिए किसी तरह के रिश्ते निभाना हो तो


तो प्रेम से निभाओ ,

वरना ना राधा, बनो ना मीरा....


हमारे नजरो से भी दूर चले जाओ।

मतलवबी रिश्तों से ओर रिश्तेदारों से


दूर रख प्रभु ,जो गम कम करने की जगह

आँखों मे बस आँसू दे जाते है।


जब भी आते है,एक बुरा एहसास वापिस

दोहराते है

************************************************

धन्यवाद

कविता यादव



टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अपमान क्या होता हैं

                    टॉपिक - अपमान प्रत्येक व्यक्ति का अपना एक मान सम्मान होता हैं। चाहे वो गरीब हो या अमीर इसलिए अगर आप किसी का अपमान करते हो तो दस बार नही तो एक बार तो अवश्य ही सोचे क्युकी प्रत्येक व्यक्ति की अपनी एक सेल्फ रिस्पेक्ट  होती है।  और चलिए मान लेते हैं की जाने अंजाने में आपसे किसी की इंसइल्ट हो गई तो उससे माफी मांग ले क्युकी माफी मांगने से कोई छोटा नही हो जाता लेकिन यही बात तो है की लोग अपने अहम में इतने डूबे हुई होते है की उन्हे अपने आगे कोई नही दिखता बस अपमान का बदला अपमान से ही देते हैं और अपशब्द कहने लगते है इससे होता ये है की आपके हाथ तो कुछ नहीं लगता उल्टा इसका दुष्प्रभाव आपके स्वास्थ पर पड़ता हैं। इसलिए अच्छे बने बुरे नहीं सम्मान करे अपमान नही एक समय बाद सब कुछ बदल जाता हैं, इंसान के जीवन की कुछ बाते होती है जो उसको हमेशा प्रभावित करती हैं उसके जाने अनजाने में कही गई बाते उसके अपमान का कारण बन जाती हैं। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है की कर्म किए जाओ फल की चिंता ना करो इस...