टॉपिक - अपमान
प्रत्येक व्यक्ति का अपना एक मान सम्मान होता हैं। चाहे वो गरीब हो या अमीर इसलिए अगर आप किसी का अपमान करते हो तो दस बार नही तो एक बार तो अवश्य ही सोचे क्युकी प्रत्येक व्यक्ति की अपनी एक सेल्फ रिस्पेक्ट होती है।
और चलिए मान लेते हैं की जाने अंजाने में आपसे किसी की इंसइल्ट हो गई तो उससे माफी मांग ले क्युकी माफी मांगने से कोई छोटा नही हो जाता लेकिन यही बात तो है की लोग अपने अहम में इतने डूबे हुई होते है की उन्हे अपने आगे कोई नही दिखता बस अपमान का बदला अपमान से ही देते हैं और अपशब्द कहने लगते है इससे होता ये है की आपके हाथ तो कुछ नहीं लगता उल्टा इसका दुष्प्रभाव आपके स्वास्थ पर पड़ता हैं। इसलिए अच्छे बने बुरे नहीं सम्मान करे अपमान नही
एक समय बाद सब कुछ बदल जाता हैं, इंसान के जीवन की कुछ बाते होती है जो उसको हमेशा प्रभावित करती हैं उसके जाने अनजाने में कही गई बाते उसके अपमान का कारण बन जाती हैं। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है की कर्म किए जाओ फल की चिंता ना करो इसलिए अच्छे कर्मों को अपनाओ बाकी बुरे कर्म करके किसी का अपमान करके अपने कर्मो को खराब ना करिए।
चलिए उन महत्वपूर्ण तथ्यों की तरफ नज़र डालते हैं, जो अपमान के तथ्य को प्रभावित करते हैं।
दूसरो से तुलना कम करें
कभी - कभी ऐसा होता है की व्यक्ति अपने आप को दुसरो के बराबर समझने की कोशिश करने लगता हैं, और यही बात उसके अपमान का कारण बन जाता हैं। केवल बराबरी करने से आप व्यक्ति के बराबर नहीं हो जाते सोचिए उस सख्स ने जिसकी बराबरी आप कर रहे हो उसने कितनी मेहनत करी होंगी तो मेहनत करने की अपेक्षा दूसरो पर ध्यान देना छोड़े नही तो यही बात आपके अपमान का कारण बन जाती हैं।
वाणी पर संयम रखें
वाणी पर संयम रखना अत्यंत आवशयक है वरना यही वाणी आपके अपमान का कारण बन जाता हैं। इसलिए हर वक्त किसी को अपशब्द बोलना, किसी का अपमान करना कुछ समय के लिए खुश होने तक तो ठीक हैं पर कोई भी व्यक्ति एक सीमा के बाद व्यक्ति को उसकी ओकाद दिखाने में आ जाता है तब केवल अपमान ही हासिल होता हैं इसलिए किसी को भी कड़वे वचन ना कहे।
अपने से छोटो खासकर बच्चों को अनदेखा ना करें
आपका कर्तव्य है की आप अपने से छोटे या छोटे बच्चो को अनदेखा ना करे जब तक की वो अपने पैरो पर ना खड़े हो जाए नही तो यह बच्चे नादानी में ऐसा कुछ कर जाते हैं, जिसकी बजह से आपको समाज के अपमान का घुट पीना पड़ता हैं। इसलिए प्रत्येक माता पिता को अपने बच्चो का पालन पोषण ईमानदारी से करना चाहिए नही तो वो अपने गलत क्रिया कलापों से समाज में आपके अपमान का कारण बन जाते हैं। इसलिए उनपे हमेशा नजर रखे उनका ध्यान रखें।
आचार्य चाणक्य ने अपमान शब्द के बारे में कहा है
आचार्य चाणक्य कहते है की जब कोई आपका अपमान करता हैं, तो उसे उसकी ही भाषा में जबाव देना नही चाहिए क्युकी उसका काम ही आपको ऐसा करने के लिए उकसाता है की आप भी वही गलती करो जो सामने वाला व्यक्ति कर रहा हैं। इसलिए अच्छा है की आप ऐसी परिस्थिति में चुप रहें और उसकी तरफ देखकर सिर्फ मुस्करा दे और उससे कुछ नही कहे, क्युकी इससे आपको ही गुस्सा आएगा जो की वो चाहता भी यही था इसलिए खुद को अपमान से बचने के लिए शांत रहे ताकि गुस्सा करने वाला व्यक्ति खुद शर्मिंदा हो जाए।
भले के लिए अपमान
कभी आपने सोचा है कि ये अपमान शब्द का प्रयोग अपमान के लिए ही प्रयोग में नही आता इसका प्रयोग कभी - कभी आपके बड़े आपको सही राह दिखाने के लिए भी करते है। तो उसका बुरा मानने की अपेक्षा आप उनकी बातो पर अमल करें क्युकी ये बाते आज तो आपको बुरी लग रही है परंतु भविष्य में आगे आपके ही काम आयेगी और तब याद आएगा आपको की आप के बड़े आपको नुकसान नहीं बल्कि आपकी भलाई के लिए डांडते थे जो आपको अपमान लगता था। इसलिए कभी बड़े आपको कोई बात के लिए अपमान करें तो उसका बुरा ना माने बल्कि उनको एक सिख समझ कर अपनाए।
अपमान का घूंट पी लीजिए
कभी ऐसा होता है की कोई व्यक्ति आपका बिना कारण ही अपमान करता हैं। और आप उसे बस सहन करते रहते हो, उससे होता ये की वो आप पर और हावी होने लगता हैं और आप अपमान का घूंट पीते रहते हो लेकिन आप सहन तो कर लेते हो और कोई जबाव नहीं देते लेकिन याद रखिए अच्छे इंसान के साथ हमेशा अच्छा होता हैं और जो व्यक्ति आपको तंग करता है अपमान करता है वो एक दिन आप के जबाव से तो बच जायेगा लेकिन उप्पर वाले की नजरों से नही बचेगा क्युकी उप्पर वाला सब देखता हैं इसलिए आप कुछ मत बोलिए और अपमान का घूंट पी लीजिए लेकिन उप्पर वाला उस व्यक्ति को उसके कर्मो की सजा आज नही तो कल दे ही देगा आखिर वो है तो इंसान ही ना.. भगवान तो नही हैं।
चलिए अब जानते है अपमान से जुड़े कुछ अनमोल विचार
मजाक में कहे शब्द सहन कर लेते है, पर अपमान के शब्द बर्दास्त के बाहर होते है।
जिनको दूसरो की अपमान करने की आदत होती है , माना जाता है की वो अपने लिए स्वयं दुश्मनी का गढ़ा खोदता हैं।
अगर स्वयं को अपमान और बेज्जती से बचाना है, तो पहले स्वयं सम्मान करना सीखें
अपने धन और रुतबे के घमंड में दूसरो का अपमान ना करें।
कुत्तो के जैसे भोकने वालो को नजर अंदाज करें वो केवल अपमान कर सकते है, और कुछ नहीं क्युकी ये उनके संस्कार हैं, आपके नहीं
हमेशा सहा बेज्जिती ना करा अपमान किसी का, सहन करते करते कहने लगे वो लोग, ये नही किसी काम का फर्क नही पड़ता हमे ऐसी बातों
आखिर में बस इतना ही कहेंगे की ना किसी का अपमान करें ना किसी के अपमान को सहन करें जब बर्दास्त से बाहर हो तब ज़बाब दे, लेकिन याद रखिए इन गलत बातो से तो अच्छा है चुपी साध ले क्युकी ज्यादा बोलने की अपेक्षा शांत रहना सही अपमान करना और सहने की अपेक्षा किसी काम में लगे रहे।
https://triveniunity.blogspot.com/2024/02/blog-post_21.html
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें