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लोग निराले होते हैं..(शीर्षक)

 Hi 👋 friends  आज की मेरी कविता लोगो के स्वभाव पर आधारित है। जहा लोग पल - पल मे अपने स्वभाव को बदलते रहते है।उसके साथ ही अहंकार का चादर ओढ़ कर अपनी पैर के नीचे की चादर को भूल जाते है। और उसी मे मग्न रहते है,तभी तो मैने इन्हे कहा की एसे लोग तो गजब और निराले होते है। लोग निराले होते है(कविता) *********************** छु लेते है जो दर्द किसी का  लोग निराले होते है जो साथ रहे पर साथ ना दे,  ये अजब सी बाते लगती है साथ देने पर भी दिल को दुखाये ,  लोग निराले होते है छुलेते है,जो दर्द किसी का  लोग निराले होते है... चलते- चलते जो राहै बदले , मोड़ पे बाते होती है अनजाने में फिर मिल गए, ये सोच के क्यों ये हस्ते है हम छोटे है एहसास ये दे, ये उनकी अकड़ ही दिखती है छुलेते है,जो दर्द किसी का  लोग निराले होते है। पलपल जीने ना हमको दे ये  केसी आदत लगती है इंसान के रूप में ये हमे डराए, ये शक्ल भी अजीब ही लगती है बिना किसी के ये हक आजमाए ये थानेदार क्यों बनती है। छुलेते है जो दर्द किसी का लोग निराले लगते है। *********************************************** कविता का भाव...

व्यवहार (शीर्षक)

 HI FRIENDS👋 नमस्कार       💐💐💐💐💐🌹🌹🌹🌹🌹🌹 ये आप सब के लिए ....    दोस्तों एक व्यवहार ही है।जो हमें ये दिखा देता है की क्या अच्छा है क्या बुरा ? इसलिए अपना व्यवहार हमेशा अच्छा रखे .... इसी पर आधारित कविता व्यवहार पड़िये ओर बताइये आप सब को केसी लगी........           कविता का शीर्षक व्यवहार     ****************************** ना मिले किसी से इतना ,कि वो प्यार ही ना रहे। दूर इतना भी ना रहे,की बेकार कहलाये.. अपने व्यवहार को कुछ, इस तरह बना लिया हमनें। की हमको कोई बुरा कहे ,ऐसा ना कुछ किया हमनें अपने व्यवहार में मिठास, इतनी भी ना घोली। की उसे चापलूसी का नाम मिला.. ओर ना इतनी कड़वाहट मिलाई की घमंड का कोई मेडल मिला.... जब भी मिले सयम बना के रखा.. बुरा कहे इससे पहले ही,उसे अपना कहा साथ ना दे कोई भले ही पर अपनी भलाई का दामन ना छोड़ा... दिया संस्कार अपने बड़ो ने कुछ ऐसा की दर्द दूसरों को होए तो क्यों  अपनी आँखे भी रोये.... दो पल की जिंदगी है,दोस्तों ना हम रोये ना तुम रोये...... कविता का भावार्थ **************** अपना व्यवहार...

अपना ज़मीर (शीर्षक)

 Hi friends👋नमस्कार🙏 ***************************** कविता का शीर्षक मान ईमान फ्रेंड्स आज की कविता मान ओर ईमान पर आधारित है।जिसकी कमी ना जाने क्यों कम सी होती जा रही है?और अगर ऐसा ही रहा तो व्यक्ति दो घड़ी साथ बैठकर अपने दुख दर्द किस्से बांटेगा....!इसलिए friends इतने स्वार्थी ना बने की सबके रहने पर भी अकेले रह जायेंगे....।।।।                      मान ईमान नहीँ                  ***************** उम्मीद बया करती है हर बात अल्फाज़ कम पड़ जाते है.. बयां करने में..... हर बात की कोई मंजिल नहीँ मेहनत भी ना कोई काम आई आजकल की दुनिया में ईमान का कोई मान नहीं.....।। कोशिश करते हैं तोड़ने में इतना पसीना बहाया है ना जाने कहा गयी मेहनत बस तकलीफो का ही आलम है...।। ये बात मगर सच हो गयी दुनिया बहुत बदल गयी है पहले से कोई दिलदरिया नहीं कोई मन में समंदर नहीँ ओर आखो में वो प्यार और मोहब्बत नहीँ...।।।। *************************************************कविता का भावार्थ *************** कविता का भावार्थ यही है...