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क्युकी लड़के रोते नहीं हैं (शीर्षक)

Hi friends 👋
नमस्कार
🙏
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आज की कविता ये बताती है।की केवल लड़कियां या women या नारी ही नही अपने दुखो से लड़कर हारकर रो देती हैं,वो अपने दुखो को आशुओ के रूप में बहार निकाल देती हैं।लडको का भी दिल कमजोर होता हैं पर वो किसी को दिखाते नहीं ।क्युकी उनके पास ढेरों जिम्मेदारियां होती हैं, और उन्हें ये लगता है कि अगर हम कमजोर पड़ गए तो हमारे परिवार का क्या होगा,बस इसलिए लड़के अपना दुख किसी को दिखाते नही इसका मतलब ये नहीं कि लड़के रोते नहीं,बस वो दिखाते नहीं है।


क्योंकि लड़के रोते नहीं है

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 नारी के जैसे कमजोर

नहीं होते हैं

अपने सारे दर्द को 

आसुओं में

नहीं ये भिगोते हैं,

क्योंकि लड़के रोते नहीं हैं।


अक्सर अपने दिल में

सब रखते हैं,

अपनी सारी बातों को

बयां नहीं ये करते हैं ,

क्योंकि लड़के रोते नहीं हैं।


कभी कभी ये भी

टूट के चूर होते हैं ,

अपनी बेबसी को

अपनों की खातिर

बस सह लेते हैं ,

क्योंकि लड़के रोते नहीं हैं।


ये भी अगर कमज़ोर हुए तो

कौन सब को संभालेगा...

कैसी भी परिस्थिति को ये

हर सम्भव झेल लेते हैं,

क्योंकि लड़के रोते नहीं हैं।


माना इंसान ये भी हैं पर

मजबूती भी तो जरूरी है,

यही तो एक कारण है

नारी कितनी भी कमज़ोर हो पर,

नर की बराबरी कहीं नहीं।

चाहे कितनी बड़े मगर,

मर्यादा हर में सम्भव है,

आधुनिकता में डटे रहे

पर हर नर क्रूर नहीं होते हैं

क्योंकि लड़के रोते नहीं।

***************************कविता का भावार्थ

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हमारा समाज, हमारा देश,या पूरी दुनिया में ही पुरुष समाज को हमेशा से ही मजबूत और जिम्मेदारियां निभाने वाला माना जाता हैं। और उनकी एक छबि बना दी गई है कि वो रोते नहीं है।पर एसा नहीं है, है  वो भी इंसान ही  है। अपने,अपने लोगो के लिए और अपने परिवार के लिए वो अपने आशु किसी को दिखाते नहीं है। इसलिए तो कहते हैं कि लड़के रोते नहीं हैं।

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                    🙏धन्यवाद🙏

                🙏कविता यादव🙏

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