HELLO FRIENDS 🙏 नमस्कार🙏
कविता का शीर्षक अदभुत अविचल अचरज
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आज की कविता अदभुत अविचल अचरज कैसी है जिंदगी
अर्थात जिंदगी का कुछ नहीं कहा जा सकता क्युकी इसके बारे में हमें कुछ नहीं पता,हम तो बस कठपुतली के जैसे उस उप्पर वाले के हाथो से बधे है। और वो जैसे नचाता है,हम नाचते है इसलिए तो इस कविता मे कहा गया है,अदभुत अविचल अचरज केसी है,जिंदगी।
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अदभुत अविचल अचरज भरी,कैसी है ये जिंदगी
कभी हँसाए कभी रुलाये,केसी है ये जिंदगी
जो कुछ हम दिल से चाहे , वो हाथों से फिसली जाए
अदभुत अविचल अचरज भरी कैसी है जिंदगी….
कभी ,तो आँख भर आये ,कभी आसमानो पर उड़ाए
ख़ुशी मिले कभी ऐसी ,कभी जो हम करना न चाँहे
हमसे ए वो भी करवाए ,कैसी है जिंदगी…….
अदभुत अविचल अचरज भरी कैसी है ए पहेली
कभी हमें कोई राह दिखाए ,ऐसा जब हम दिल से चाहे
पर ना जानें क्यों ए दुःख के बादल , फीर लहराए
कैसी है जिंदगी
अदभुत अविचल अचरज भरी कैसी है जिंदगी …..
धीरज रख ए कहना चाहे ,कैसी है जिंदगी
अदभुत अविचल अचरज ,भरी कैसी है जिंदगी……
वारे- वारे जिंदगी ,गम हमारे खत्म ना होये
फीर भी हमसे तू कहती जाए ,जीना है तुझे जी के दिखा
हर परीक्षा पार कर जा तू , कहती हमसे तू जाए ऐसी है जिंदगी
अदभुत अविचल अचरज भरी कैसी है जिंदगी……
क्यु मुझको ये समझ ना आये कैसी है पहेली
अदभुत अविचल अचरज भरी , कैसी है ये जिंदगी……
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कविता का भवार्थ
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कविता का भावार्थ यही है कि जिंदगी अदभुत है, और इसको जीना भी अचरज से भरा नहीं है,जिसमे हज़ारों विपदा और परेशानियां आती है।फिर भी हम इम्तिहान से इम्तिहान दिए जाते है।फिर भी जीते रहते हैं।तभी तो ये जीवन है,जो अदभुत है।
धन्यवाद
🙏
कविता यादव
🙏🙏🙏🙏
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