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तकलीफ़ सहते हैं,पर शिकायत नहीं करते(शीर्षक)

HELLO FRIENDS 🙏नमस्कार🙏
कविता का शीर्षक तकलीफ
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आज की कविता का सीधा सा अर्थ है।की कुछ लोग हज़ारों तकलीफों को शह लेते है।पर कोई शिकायत नहीं करते,इसका मतलब ये नहीं कि उनको कोई तकलीफ़ नही होती,वो तो बस अपने कर्तव्यों की ही तरफ ध्यान देते है,बाकी सब भगवान पर छोड़ देते हैं

 तकलीफ सहते है ! पर शिकायत नहीं करते है।

कुछ लोगो को हम हमारी जिंदगी में कुछ समझते नहीँ

तकलीफ सहते है।पर कोई शिकायत करते नहीँ।


क्यों अपने पर गुमान किया करते है।

कुछ लोग क्यों दुसरो को दर्द दिया करते है।


भूतकाल की तकलीफों को गिना करते है।

वर्तमान भी खराब किया करते है।

ओर भविष्य का भगवान भी खुदको ही समझते है।


हम इसलिए अपनी जिंदगी में कुछ लोगो को कुछ

समझते नही।

तकलीफ सहते है,पर शिकायत कुछ करते नही।


हमारे हाथों में वो छल की लकीरें नहीँ

दूसरी ! किस्मत भी हमारी कुछ खास नही।


फिर भी किसी को कोई दर्द देते नहीँ

इसलिए हम इंसान है।बस भगवान किसी के बनते नही


इसलिए कुछ लोंगो को हम कुछ समझते नहीँ

तकलीफ सहते है पर शिकायत करते नही.......

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कविता का भावार्थ

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हज़ारों ग़म को शह कर भी कोई शिकायत नहीं करते वो इंसान ,इंसान नहीं भगवान से कम नहीं होते क्युकी सच्चे और अच्छे इंसान कभी किसी को किसी भी दर्द और तकलीफ़ के लिए दुसरो को कोई सजा नहीं देते।तो आप ही बताओ एसे आपने कितने इंसान देखे।

बताइए



🙏धन्यवाद🙏

🙏कविता यादव🙏

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