सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

जैसे को तैसा(शीर्षक)

        Hello friends 🙏नमस्कार🙏

          कविता का शीर्षक जैसे को तैसा

   ***********************************


आज मेरी ये कविता जैसे को तैसा ये बताती हैं। कि दुश्मनी को खत्म करना है ।तो दुश्मन को दोस्त बना लो,किन्तु रावण नीति व विदुर नीति में यह भी प्रदर्शित हैं।की शत्रु,रोग,अग्नि, और सर्प का दमन उचित अवसर मिलते ही कर देना चाहिए। अतः यदि प्रतीत हो कि कोई व्यक्ति क्षमा का महत्व नहीं समझ रहा तो फिर उसके साथ वहीं व्यवहार करना चाहिए ,जो व्यवहार उसने हमारे साथ किया है।

*************************************

एक कहावत बहुत पुरानी

          प्राचीनकाल से जानी जाती।


इसमें छिपा छोटा सा संदेश

           जो व्यक्ति का व्यवहार बताती।


सोचें- सोचें जल्दी सोचे

            बिन सोचे कुछ ना होए।


खून का बदला खून बोलकर

             हिंसा को जो लाता हैं।


इस प्यारे संदेश को देखो

              नाम भी गन्दा करता है।


गलाकाट प्रतिस्पर्धा में

              जीवन के प्रतेक क्षेत्र में 

सत्यता का भाव दिखाता है।


आज मानव उदार ह्रदय ना

            दयालु और ना सहयोग भाव का है।


आत्मरक्षा की प्रक्रिया में 

              सिख ये अच्छी देता है।


इस छोटे संदेश को सुनकर

              आप ना यू विचलित हो जाए।


जानो क्या सोचो संदेशा

                जैसे को तेसा मिलता है।


कर्म अगर बुरे करे तो

                  उप्पर वाला इसकी परीक्षा जरूर करता है।


सीधे - साधे इंसान को जो

                   राक्षेस बनकर खाते है।


शत्रु,रोग,अग्नि, और सर्प

                    शाप उसको ये मिलता है।


बुरे कर्म का बुरा नतीजा

                     इस जन्म भुगतता हैं।


सात जन्म देखे किसने 

                     बुरा किया है,इसी जन्म में जिसने

जैसे को तैसा मिलता हैं

                      

दुख पोहुचाया जानबूझकर 

                 अगर किसी ने

दृष्टि उसकी तीसरी खुलती देखता है

                        

तैयार बैठा वो पाप नापने को

                   भगवान जिसे तू कहता है।


*********************************************

कविता का भावार्थ

****************

बुरा इंसान जितना भी बुरा करले,जितने चाहे उतने षड़यंत्र रचले! अपनी नजरो से अपने पापो को छुपा सकता है।पर उसकी नजरों से कोई नहीं बच सकता है।याद रखिए।

*********************************************

                 धन्यवाद

                                  🙏

               कविता यादव

                                   🙏


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अपमान क्या होता हैं

                    टॉपिक - अपमान प्रत्येक व्यक्ति का अपना एक मान सम्मान होता हैं। चाहे वो गरीब हो या अमीर इसलिए अगर आप किसी का अपमान करते हो तो दस बार नही तो एक बार तो अवश्य ही सोचे क्युकी प्रत्येक व्यक्ति की अपनी एक सेल्फ रिस्पेक्ट  होती है।  और चलिए मान लेते हैं की जाने अंजाने में आपसे किसी की इंसइल्ट हो गई तो उससे माफी मांग ले क्युकी माफी मांगने से कोई छोटा नही हो जाता लेकिन यही बात तो है की लोग अपने अहम में इतने डूबे हुई होते है की उन्हे अपने आगे कोई नही दिखता बस अपमान का बदला अपमान से ही देते हैं और अपशब्द कहने लगते है इससे होता ये है की आपके हाथ तो कुछ नहीं लगता उल्टा इसका दुष्प्रभाव आपके स्वास्थ पर पड़ता हैं। इसलिए अच्छे बने बुरे नहीं सम्मान करे अपमान नही एक समय बाद सब कुछ बदल जाता हैं, इंसान के जीवन की कुछ बाते होती है जो उसको हमेशा प्रभावित करती हैं उसके जाने अनजाने में कही गई बाते उसके अपमान का कारण बन जाती हैं। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है की कर्म किए जाओ फल की चिंता ना करो इस...