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जीवन का स्त्य अंत(शीर्षक)


    Hi friends ✋नमस्कार

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 मेरी आज की कविता जीवन की सच्चाई बताती है कि कोई कुछ भी करे पर आप तुच्छ बाते और तुच्छ सोच रखने वालो से बात ना करे क्युकी एसे लोग आपके किसी काम के नहीं होते है।ये आख़िर मे केवल धोखा ही देते है...बस धोखा...

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जीवन का सत्य अंत(शीर्षक)

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तुच्छ बाते तुच्छ अफ़सोस ना करिए

आंखे मूंदकर गलतियों का हार ना पहनिए

मुड़कर देखने वाला कोई होता नहीं

अपने जज्बातों को अपनो तक ही रखिए


महज़ खोलकर रख दीजिए अपने अरमान

पर ध्यान से विश्वास की किताब खोलिए

आशुओं की धार दिल से जुड़े होते है

अपने अहसास जाहिर ना कीजिए


कमी निकालने वाले मिलेंगे हज़ार 

कोई तकलीफ़ समझे उसे ढूंढिए 

पता चलता कहा अपनो की बातो से

पर हरेक पर विश्वास भी मत करिए


हम हाथ ढूंढे कांधे पर समझने वाला

पर पीठ पीछे हंसी उड़ाते है बहुत

बहुत नजदीक से देखा है,जिंदगी को

की आजकल अपने को भगवान समझते है,लोग बोहत


कहने को कहे लाख बुराई 

अपने पे जब आई तो आंख ना मिलाई

कोई अहंकार में डूबा तो कोई धन - दौलत के दिखावे में


पर एक बात कहूं सच्ची मे दोस्तों 

जब अंत आया तो साथ लेजा ना पाती हैं जिंदगी कुछ भी

क्युकी अंत ही जीवन का सत्य है

जो है आखरी तलक साथ , वहीं आपका है अपना

कोई और आपका कहने से कुछ होता नही है।


***************************कविता का भावार्थ

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जो आपका अपना होता है।वो आप पर आंख मूंदकर विश्वास करता हैं,ना परेशान करता हैं ना कोई एहसान करता हैं,क्युकी जो आपका हो वो बस आपको अपना समझता हैं।

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 धन्यवाद

      🙏

कविता यादव

       🙏

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