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धन सब कुछ नहीं होता(शीर्षक)


 Hi friends 👋 नमस्कार🙏

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               कविता का शीर्षक
                         धन
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 हमारे दैनिक आवश्यकता को पूरा करने के लिए धन सबसे शक्तिशाली माध्यम हैं,जिससे आरामदायक व ऐश्वर्य की वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं।वह धन ही है,जिसके द्वारा हम अपनी रोटी, कपड़ा,मकान की आवश्यकता को पूर्ण करते हैं।ये जीवन का एक कटु सत्य है।पर दूसरी और ये भी सत्य है कि मानव जीवन का आदि व अंत धन नहीं है।


धन ही सब कुछ नहीं

पर धन जरूरत है

बिना धन कोई काम ना होए

पर धन रिश्ते भी तो तोड़े।


धन की जरूरत हर किसी को

पर अत्यधिक धन अहंकार भी तो पैदा करें

जरूरी नहीं कि अहम सब मे आए

पर थोड़ी सी शर्म,हया, और दुसरो के लिए दया की भावना तो रखे। 


धन से आप सब कुछ खरीद सके

पर धन से अनिष्ठा और आत्मसम्मान ना पा सके

धन से शांति नहीं खरीद सकते

पर धन से एशो आराम खरीद सकते हैं।


मानव जीवन को धन द्वारा अमर नहीं बना सकते

फिर भी बहुत शक्तिशाली कहा जाता है

धन मिले तो थोड़ा परोपकार करिए

बड़ी सी गाड़ी में बैठकर बहार के लोगो को ना भूले।


क्या धन से मां का प्यार खरीद सकते है

मां सब बच्चो को एक सा प्यार करें

पर धन से क्या ये प्यार खरीद सके

सर्वथा सब साथ रहे, सही सोच बस यही रखे।


हमनें तो धन की कहानी बस यही सुनी

ना धनी,ना लालची,ना धनपति अधिक समय तक खुश रहे

ना ये शांति से खाते है एक निवाला,ना शांति की लेते नींद

और धन के पीछे इतने पागल की परिवार ही भूले।


धन से अमर नहीं बन सकते

माना धन बहुत शक्तिशाली है

धन सब कुछ होता नहीं

पर हां धन जीवन की सबसे बड़ी जरूरत है

और जीवन को चलाने कि चाबी हैं।


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कविता का भावार्थ

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धन सब कुछ नहीं ,पर धन जीवन की जरूरत है,परंतु इसका इतना लालच भी ना करें की अपनो को और अपने रिश्तों को इसके लालच मे ख्तम ना करें,क्युकी धन हो पर अपने नहीं तो अकेले जीवन में क्या पा लिया आपने...

सोचिएगा जरूर.....🙏

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                धन्यवाद

                                  🙏 

               कविता यादव

                                  🙏



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