हेलो दोस्तों नमस्कार🙏
************************
कविता का शीर्षक मां
*********************
आज की मेरी कविता मां पर आधारित है। क्युकी मां ही है। जो आपको जानती है। और पहचानती है। माता पिता जैसा ना कोई होता है। ना उनकी जगह कोई ले सकता है।
बस खुशियां देना चाहती हुं
हर आंसुओ को पोछना चाहती हुं
मां मेरी भोली हैं।
उसे हर गम से दूर रखना चाहती बस खुशियां देना चाहती हुं
हर आंसुओ को पोछना चाहती हुं
मां मेरी भोली हैं।
उसे हर गम से दूर रखना चाहती हूं।
बोहुत इम्तिहान जिंदगी के वो दे चुकी है।
उस ऊपर वाले से उसके हिस्से का सुख
छिन्नना चाहती हूं।
जो भी उसकी खुशियों को छिन्नता है।
उसे दंड मिले उस रब से ये कहना चाहती हूं।
भावार्थ
माता पिता सा कोई नही
धन्यवाद
कविता यादव
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें